आत्मकथा ‘कुली से कुलपति तक’ के विमोचन समारोह में बोले केबिनेट मंत्री पटेल

यह किताब युवाओं को अच्छी बातें और संस्कार सिखायेगीआने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है यह आत्मकथा – राज्यसभा सांसद डाॅ. सोलंकीयह प्रेरक आत्मकथा हर लायब्रेरी में हो तथा प्रत्येक युवा इसे पढ़े-कलेक्टर श्री वर्मा

बड़वानी।उन्होंने कहा की आत्मकथा के विमोचन के कार्यक्रम बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ। डाॅ. यादव ने बड़वानी का नाम रोशन किया है। यह किताब युवाओं को अच्छी बातें और संस्कार सिखायेगी। बड़वानी जिले ने हर क्षेत्र में विकास किया है। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भी बहुत उन्नति हुई है। ये बातें केबिनेट मंत्री श्री प्रेमसिंह पटेल ने शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा इतिहासकार एवं पूर्व कुलपति अवधेश प्रतापसिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलपति द्वारा लिखित आत्मकथा ‘कुली से कुलपति तक’ के विमोचन के लिए आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में कहीं। वे आयोजन के मुख्य अतिथि थे। राज्यसभा सांसद डाॅ. सुमेरसिंह सोलंकी विशेष अतिथि थे। अध्यक्षता कलेक्टर श्री शिवराजसिंह वर्मा ने की। राज्यसभा सांसद डाॅ. सुमेरसिंह सोलंकी ने आत्मकथा के प्रकाशन पर डाॅ. यादव को बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बताया। युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत अध्यक्षीय उद्बोधन में कलेक्टर श्री शिवराज सिंह वर्मा ने कहा कि किसी व्यक्ति का कुली से कुलपति बनना आश्यर्चचकित कर रहा है। यह उल्लेखनीय प्रगति है।

सफल व्यक्ति की आत्मकथा को पढ़कर ज्ञात होता है कि संघर्ष आवश्यक है और मेहनत कभी भी निष्फल नहीं होती है। यह प्रेरक आत्मकथा हर लायब्रेरी में रखी जानी चाहिए तथा प्रत्येक युवा को इसे पढ़ना चाहिए। इसकी आॅडियोबुक भी बनना चाहिए ताकि डिजीटल प्लेटफार्म से यह असंख्य लोगों तक पहुंच सके और वे इसे अपनी सुविधा के अनुसार सुनकर लाभान्वित हो सके।

आयोजन में विशेष उपस्थिति एसडीएम श्री घनश्याम धनगर, सौरभ यादव, डाॅ. राखी यादव, सुमित यादव, प्रीति यादव, कुणाल मंडलोई, प्राची मंडलोई, सचिव दुबे की रही। इसमें जनप्रतिनिधिगण, प्रशासन, साहित्य और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों के साथ ही बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकगण सम्मिलित हुए।

प्राचार्य डाॅ. एनएल गुप्ता ने व्यक्ति परिचय एवं स्वागत भाषण दिया। शोएब आदिल, डाॅ. दिलीप माहेश्वरी, श्रीराम यादव, डाॅ. पी. गौतम, डाॅ. प्रमोद पंडित ने विचार व्यक्त किये। यह है इसकी रचना का उद्देश्य आत्मकथाकार डाॅ. शिवनारायण यादव ने कहा कि आत्मकथा लेखन का उद्देश्य अपने जीवन की सात दशक की यात्रा के अनुभवों को आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोना है। वे इसे पढ़कर प्रेरित हो सकें और अपनी जिंदगी में प्रगति का पथ तलाश सके, तो मेरा श्रम सार्थक सिद्ध होगा। श्रीमती सुशीला यादव ने कहा कि यह आत्मकथा सम्पूर्ण समाज की धरोहर है। इन्होंने की समीक्षा

डाॅ. मधुसूदन चौबे ने आत्मकथा की समीक्षा करते हुए कहा कि- पांच सौ पृष्ठों की यह रचना हर वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी है। इसे पढ़कर एक अच्छा विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षा प्रशासक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, समाजसेवक, परिवार का मुखिया, साहित्यकार बनने के सूत्र प्राप्त किये जा सकते हैं। लेखक ने ईमानदारी से अपने जीवन के प्रत्येक पहलू को शब्द दिये हैं। एक ऐसा शब्द चित्र गढ़ा गया है, जिसके माध्यम से सात दशकों की साधना से तैयार हुए व्यक्तित्व को समझा जा सकता है। संचालन प्रीति गुलवानिया ने किया और आभार डाॅ. पी. गौतम ने व्यक्त किया।

पौधे, स्मृति चिह्न, आरती, तिलक और बेज से अतिथियों का स्वागत कार्यकर्तागण प्रीति गुलवानिया, किरण वर्मा, सलोनी शर्मा, अंतिम मौर्य, वर्षा शिंदे, उमेश राठौड़, अंकित काग, जगमोहन गोले, नंदिता गोले, वर्षा मुजाल्दे, वर्षा मालवीया, नमन मालवीया, दिव्या पाटिल, हिमांशी वर्मा, गोविंद निंगवाल, सुरेश कनेश, स्वाति यादव, अंशुमन धनगर, प्रदीप ओहरिया, कन्हैया फूलमाली, रीना मौर्य, लाली वर्मा, राहुल वर्मा, राकेेश बर्मन, राहुल सेन ने किया। आयोजन की हुई सराहना।

कॅरियर सेल के युवा कार्यकर्ताओं द्वारा विमोचन समारोह के आयोजन की व्यवस्था की सभी ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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