मोहमाया का बंधन ही भक्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न कराता है: श्री रामस्नेही आरती दीदी

सेंधवा। अपनी भक्तिमयी परम्परा का निर्वहन करते हुए विगत 86 वर्षो से दाजी परिवार द्वारा ज्ञानदायिनी श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन श्री शरद रामगोपाल पालीवाल एवं एडव्होकेट जितेन्द्र पालीवाल के यहां किया जा रहा है। कथा के 5 वे दिवस पर कथावाचक श्री ‘ रामस्नेही आरती दीदी ने अपने श्रीमुख से “श्री कृष्ण जन्म, श्री कृष्ण लीलाएँ एवं श्री कृष्ण गोपी संवाद का बड़ा ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया।

मोहमाया का बंधन ही भक्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न कराता है:रामस्नेही आरती दीदी

उन्होंने बताया की ये मोहमाया का बंधन ही है जो हमें भगवान भक्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न कराता है।सात कोस के विशाल गोवर्धन पर्वत को ब्रजवासियों की रक्षा हेतु एवं इंद्रदेव का मान-मर्दन करने के लिए गिरी को अपनी अंगुली पर धारण किया तो प्रभु श्री गिरीराजजी धरण भी कहलाये।

इस अवसर पर श्री गिरीराज जी महाराज को 56 भोग का नवेध बताया गया।श्री दीदी एवं मामाजी श्री कल्लु शर्माजीद्वारा श्री गिरीराजजी परिक्रमा भजन की सुंदर मनमोहक प्रस्तुती दी गई जिस पर सभी भक्तजन मानसिक रूप से गोवर्धन परिक्रमा करते हुए भक्ति में सारोबार होकर झुम उठे।

हिमांशु मालाकार की रिपोर्ट

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