गणेश जी के व्यक्तित्व में सीख सकते हैं सफलता के सूत्र

बड़वानी। अग्रपूज्य विघ्नहर्ता गणेशजी के व्यक्तित्व की विशिष्टताओं से युवा सफलता के अनेक सूत्र सीख सकते हैं। धीरता, गंभीरता, अधिक श्रवण, आत्मसम्मान, सात्विकता जैसे अनेक तत्व हैं जो उनके व्यक्तित्व से प्रतिबिम्बित होते हैं। ये बातें कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे ने शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं।

यह आयोजन प्राचार्य डाॅ. एनएल गुप्ता के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने बताया कि इन दिनों दस दिवसीय गणेशोत्सव चल रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में युवाओं को प्रतिदिन महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की जाएंगी।

क्या-क्या सीख सकते हैं गणेशजी के व्यक्तित्व से

कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे ने चित्रकार सोनिका पाटीदार के द्वारा बनाई गई गणेषजी की तस्वीर के माध्यम से युवाओं को समझाते हुए कहा कि गणेषजी की शारीरिक बनावट अनेक महत्वपूर्ण बातें बताती हैं।ये विद्यार्थी
शिक्षक, प्रशासक तथा सभी क्षेत्रों में कार्य करने वाले व्यक्तियों को बहुमूल्य शिक्षाएं देती हैं।

♦️ गणेश जी का गज मस्तिष्क बुद्धिमत्ता का परिचायक है। सामान्यतः हाथी धीर, गंभीर और शांतचित्त होता है

♦️उनकी आंखें छोटी हैं, जिसके कारण मन के भाव अन्य व्यक्ति नहीं पढ़ सकता है। ♦️बड़े कान अधिक से अधिक सुनने की प्रवृत्ति के द्योतक हैं। ♦️प्रत्येक व्यक्ति को भी विवेकशील, गंभीर, मन के भावों को प्रकट न होने देने वाला, अच्छी बातों पर ध्यान देने वाला, स्वाभिमानी और शक्तिशाली होना चाहिए। ♦️गणेष जी को मोदक बहुत पसंद है, जो सात्विक आहार होकर बुद्धि को स्थिर बनाता है। ♦️ उनका बड़ा उदर पाचन क्षमता को दर्शाता है एक व्यक्ति को भी सभी रहस्य पचाकर रखने में क्षमतावान होना चाहिए। ♦️उनकी चार भुजाएं चार पुरुषार्थों की प्रतीक हैं। संचालन वर्षा मुजाल्दे ने किया।

आभार नमन मालवीय ने व्यक्त किया। सहयोग प्रदीप ओहरिया, स्वाति यादव, दिव्या पाटिल, कन्हैया फूलमाली, धीरज सगोरे, जगमोहन गोले ने दिया।

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