गुरु पूर्णिमा पर कार्यकर्ताओं ने किया सम्मान, हुई परिचर्चा, सभी परिश्रम करके अपनी मंजिल को प्राप्त करें- डॉ. गुप्ता

बड़वानी। शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्राचार्य डॉ. एन. एल. गुप्ता, प्रो. लोकंद्र वर्मा, डॉ. प्रवीण मालवीया, कॅरियर काउंसलर डॉ. मधुसूदन चौबे तथा अन्य गुरुओं का भावभीना अभिनंदन किया। पुष्पवर्षा, पुष्पहार, आरती आदि से गुरुजनों के प्रति कार्यकर्ताओं प्रीति गुगलवानिया, सलोनी शर्मा, वर्षा शिंदे, कन्हैया फूलमाली, अंतिम मौर्य, किरण वर्मा, उमेश राठौड़, राहुल भंडोले, राहुल सेन, स्वाति यादव, राहुल वर्मा, प्रीतम राठौड़, रागिनी मालवीया, जगमोहन गोले, नंदिता गोले, निषा केवट, खुशाली मालवीया, ज्योति कुमावत, लाली वर्मा, ने किया।

इस अवसर पर गुरु की महत्ता पर परिचर्चा का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्राचार्य डॉ. एनएल गुप्ता, डॉ.प्रवीण मालवीया, प्रीति गुलवानिया, किरण वर्मा, सलोनी शर्मा आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु का सान्निध्य व्यक्तित्व को निखारकर नया स्वरूप प्रदान करता है। प्राचार्य डॉ. गुप्ता ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप सभी परिश्रम करके अपनी मंजिल को प्राप्त करें। गुरु भक्ति और गृरुकृपा पर आधारित दृष्टांत, कविता, गीत प्रस्तुत किये गये। संचालन सलोनी शर्मा ने किया। आभार प्रीति गुलवानिया ने व्यक्त किया।

स्वतंत्रता का प्रतीक तिरंगे को लहराए घर की मुंडेर पर,11 अगस्त से 17 अगस्त तक घरों पर लगाये तिरंगा

सभी स्वतंत्र देशों का अपना एक ध्वज होता है। जो उस देश के स्वतंत्र होने का संकेत है। हमारा भी एक ध्वज है जिसे हम भारतीय गर्व के साथ तिरंगा कहते है और राष्ट्रीय पर्वाे पर शासकीय व अशासकीय भवनों पर बड़े उत्साह के साथ फहराते हैं। लेकिन अब हर भारतीय के पास यह अवसर है कि वो अपने घरों पर तिरंगा फहरा सकता है। भारत सरकार एक अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत हर भारतीय अपने घरों की मुंडेर पर स्वतंत्रता के प्रतीक इस ध्वज को फहराकर गौरवान्वित महसूस कर सकता है। 11 अगस्त से 17 अगस्त तक खास तौर पर हर घर तिरंगा अभियान के लिए भारत सरकार ने भारतीय ध्वज संहिता 2002 में संशोधन भी किया है। ताकि भारतीय नागरिक को अपने घरों पर तिरंगा लहराने का अवसर मिले।

रेशम और ऊनी और सूती के तिरंगे भी फहरा सकते हैं

भारतीय ध्वज संहिता में किये गए संशोधन के बाद अब आम नागरिक हाथ से बुने एवं काते हुए कपड़े के साथ मशीन द्वारा सूती, पॉलिस्टर, ऊनी, रेशमी और खादी के कपड़ो के भी तिरंगे बना सकते है और लहरा भी सकते है।

तिरंगे का गौरवशाली इतिहास

विश्व मे एकमात्र हमारे देश का ऐसा ध्वज होगा जो देश के स्वतंत्र होने से पहले अपना लिया गया था। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैकैय्यानंद ने की थी। इसे 22 जुलाई 1947 को आयोजित हुई भारतीय संविधान सभा की बैठक में ही अपना लिया गया था। इसके बाद 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया इसके पश्चात भारतीय गणतंत्र ने इसे अपनाया।

सिटी प्राइम न्यूज़

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