आयुर्वेदिक नुस्खें से निकला 10.5 एमएम का स्टोन,आयुर्वेदिक डॉक्टर ने खुद पर अप्लाई कर बनाया नुस्खा

मेडिकल साइंस में रोज नए-नए अविष्कार और चमत्कार सुने और देखें ही होंगे। लेकिन जब किसी अत्यंत पुरानी पद्धति, कला या व्यवस्था से वैसा ही परिणाम मिले तो यह कोई सामान्य नही है। हम बात कर रहे है पथरी (स्टोन) बीमारी के उपचार की। इस बीमारी का आयुर्वेद में उपचार पहले से ही लेकिन इस पद्धति पर भरोसा न करते हुए मरीज एलोपैथिक से उपचार लेते है। महेश्वर तहसील के मेहतवाड़ा आयुर्वेदिक औषधालय में आयुर्वेद एमडी ड़ॉ. जेपी चौहान ने पथरी के निदान के लिए अपना नुस्खा तैयार है। इस नुस्खें के परिणाम भी सार्थक रूप से सामने आया। ड़ॉ. चौहान ने 22 दिनों के इलाज से ही कसरावद के 35 वर्षीय राजकुमार मोहरे की 10.5 एमएम की पथरी निकालने में सफलता पायी है।

डॉक्टर स्वयं पीड़ित रहे है

ड़ॉ. चौहान ने बताया कि आयुर्वेद में हर बीमारी का उपचार है लेकिन लोगो का इस पर अब बहुत कम भरोसा होता है। इस बीमारी से वे स्वयं भी पीड़ित रहें है। अपने खुद के उपचार ने लिए उन्होंने एक विशेष तरह ला भष्म तैयार किया। उन्होंने अपनी 11-12 एमएम और 8 एमएम की पथरी निकाली है।

राजकुमार को एलोपैथिक से नही मिला लाभ

कसरावद नगर के राजकुमार ने करीब 6 माह पूर्व धार के अस्पताल से इलाज लिया था। मगर कोई विशेष लाभ नही मिलने से अपने मित्र संजय के कहने पर मेहतवाड़ा के डॉक्टर श्री चौहान का इलाज लिया। डॉक्टर के 22 दिनों के उपचार के बाद सोमवार को मूत्रमार्ग से एक 10.5 एमएम और एक 4.6 एमएम के दो स्टोन निकले। राजकुमार मोहरे ने बताया कि एलोपैथी का करीब 20 दिनों तक इलाज लेने के बाद भी असर नही लगा। इस दौरान करीब 1500 रुपये की दवाइयां ली। इसके बाद करीब 600 रुपये की दवाइयां लेने के बाद परिणाम आया है।

गुर्दे की पथरी कैसे बनते हैं?

जब मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड और सिस्टीन जैसे कुछ पदार्थों का कंसंट्रेशन बढ़ने लगता है, तो वे क्रिस्टल बनाने लगते हैं जो गुर्दे से जुड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे आकार में बढ़ कर पथरी का रूप लेने लगते हैं।

पथरी के लक्षण

पथरी की वजह से जो सबसे आम लक्षण उभरते हैं वो है पेट या उसके निचले हिस्से में दर्द का होना जो कमर तक बढ़ सकता है। पत्थर निकालते समय दर्द का होना सबसे आम है। इसमें गंभीर कष्टदायी दर्द की लहरें भी उठतीं हैं जिसे ‘वृक्क शूल’ कहा जाता है जो 20-60 मिनट तक रहता है।

पेशाब करने में कठिनाई, मूत्र में रक्त या उल्टी हो सकती है।

पथरी मूत्र के रास्ते में फंसा रह सकता है जिससे पेशाब कर्मे में बाधा उत्पन्न होती है और दर्द होता है। गुर्दे में अगर पथरी बहुत छोटा हो तो वे रुकावट पैदा नहीं करते हैं, जिससे पथरी का कोई लक्षण नहीं दिखता है।

आयुर्वेद में पथरी का निदान

ड़ॉ. चौहान ने बताया कि पथरी के उपचार के लिए कई औषधियां है लेकिन किसे ले ये थोड़ा विचारणीय है। ड़ॉ. चौहान इसके लिए हजरल यहूदी के साथ अन्य का भष्म का एक योग तैयार किया। साथ ही गोखरू व अन्य का चूर्ण योग बनाया। इसके अलावा आयुर्वेदिक सायरफ व आयुर्वेदिक रस का उपयोग किया। परहेज के तौर पर पालक,मैथी, गोबी और दूध से बनी पदार्थो को बंद करने की सलाह दी।

एलोपैथी में पथरी का निदान

गुर्दे की पथरी का निदान अल्ट्रासोनोग्राफी या सीटी स्कैन द्वारा किया जाता है। एक्स-रे और इंट्रावेनस पाइलोग्राफी भी निदान के लिए उपयोगी होते हैं।सीटी स्कैन अधिक सटीक होता है लेकिन रोगी को विकिरण का सामना करना पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!